koronavirus के चलते इन पांच चिजो में काफी बदलाव हुई।

दोस्तो हम माने या ना माने korona वायरस हम इंसानों का ही दुस्परीनाम है। और आज हम इस korona जैसी महामारी के कारण अपने अपने घर में दुबके पड़े है । क्योंकि हम इंसानों ने प्रकृति में इतना छेड़छाड़ किया था कि करोना  जैसी भयानक बीमारी का आना स्वभाविक था।   


 जैसे कि हमने पेड़ जंगलों का काट कर वहां की बड़ी-बड़ी इमारतें बनाई और ना जाने ऐसी कितनी चीजें हमने अपनी स्वार्थ के लिए कि जिससे ये आपदा आई है।
         

                    लेकिन आज इस आपदा के आपने से हमारे प्रकृति ओर  पर्यावरण में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है जैसे -
पर्यावरण में प्रदूषण कि कमी :- 
आज जब पूरी दुनिया कोरोनावायरस के डर से शांत बैठी है तो वहीं प्रकृति में कुछ बदलाव सुधार नजर आ रहे हैं और इससे अच्छी बात क्या हो सकती हैं जहां पहले सड़के  धूल  और धुवां से धुंधला दिखता था आज पूरा साफ दिख रहा है।
 नदियों में प्रतिदिन गंदा पानी कचरा छोड़े जाते थे आज या नदी बिल्कुल साफ दिख रहा है और ना जाने कितने प्राकृतिक चीज पहले के मुकाबले में सुधरने लगे हैं।


कम होता क्राइम:- 
कोरोनावायरस के कहर से ना सिर्फ वह लोग अपने घरों में बैठने को मजबूर हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी में संघर्ष करते थे बल्कि वह लोग भी अपने अपने घर में दुबके पड़े हैं जिनकी वजह से हत्या बलात्कार अपहरण लूटपाट जैसी केशेश सामने आती थी जिसकी सबसे बड़ी वजह korona वारस है ।
             
इन लोगो के जहन में मौत का डर डाल दिया गया है और आज हम क्राइम रेट की बात करें तो बहुत कम हो रहा है।
मात्र एक छोटे से वायरस ने सभी लोगों को अपने अपने घरों में बैठने पर मजबूर कर दिया है क्योंकि यह बात इन मुजरिमों को भी पता है कि हम कहीं बाहर क्राइम करने निकलते हैं तो हमें मौत गले लगा सकती हैं।

कोरोना वायरस से जुड़ी जानकारियां:-
दोस्तों अगर इस बारे में बात करें तो सभी लोगों को करोना वायरस से जुड़ी जानकारियां मिल रही है चाहे इसके फैलने का हो या किसी भी प्रकार का जिस वजह से दुनिया का हर बच्चा बूढ़ा चाहे वह पढ़ा लिखा हो या नहीं हो लेकिन वह जानता है कि यह महामारी किस प्रकार छूने से फैल रही है।

जल्दी तैयार हो जाएगी वैक्सीन
  
कोरोना वायरस की वैक्सीन की बात की जाए तो अभी तक इस वायरस की कोई वैक्सिंग नहीं बनी है अब यहां सवाल यह उठता है कि वैक्सिंग कैसे बनता है तो मैं आपको बता देना चाहूंगा कि जब कोई नया महामारी इस दुनिया में दस्तक देता है तो बीमार व्यक्ति के जांच से पता चलता है कि इस व्यक्ति के शरीर में कौन से जीवाणु उस वायरस से लड़ने में सक्षम है तभी वैक्सीन बनती हैं।
और इस तरह की वैक्सिंग बनाने में काफी टाइम भी लग सकता है क्योंकि कोई कंपनी नहीं चाहेगी उनकी बनाई हुई वैक्सिंग से लाखों-करोड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ जाएं
         
           
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